
निर्देशक आदित्य सरपोतदार की नई फिल्म ‘Thamma’ भारतीय लोककथाओं से प्रेरित एक अनोखी प्रेमकहानी है। फिल्म दर्शकों को हॉरर, रोमांस और कॉमेडी के मिश्रण से भरी एक रोमांचक यात्रा पर ले जाती है। मुनज्या (2024) के बाद, यह फिल्म फिर से साबित करती है कि मैडॉक हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स अपनी अलग पहचान बना चुका है।
कहानी
आलोक गोयल (आयुष्मान खुराना), एक टीवी रिपोर्टर, अपने दोस्तों के साथ पहाड़ों में ट्रेकिंग पर जाता है। अचानक भालू के हमले में घायल होने के बाद उसकी मुलाकात होती है ताड़का (रश्मिका मंदाना) से — एक रहस्यमयी और जादुई महिला जो उसकी जान बचाती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच आकर्षण बढ़ता है, लेकिन आलोक जल्द ही एक अजीब जनजाति के चंगुल में फंस जाता है, जिसकी अगुवाई करता है यक्षासन (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी)। ताड़का अपने ही कबीले के ख़िलाफ़ जाकर आलोक को बचाने की ठान लेती है, और यही फैसला उसके और उसकी दुनिया दोनों के लिए एक बड़ी जंग की शुरुआत कर देता है।
निर्देशन और लेखन
कहानी नीरन भट्ट, सुरेश मैथ्यू और अरुण फुलारा ने लिखी है। स्क्रिप्ट भारतीय लोककथाओं के तत्वों को आधुनिक सेटिंग में पिरोती है। संवाद तीखे, मज़ेदार और कई जगह भावनात्मक भी हैं — खासतौर पर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के डायलॉग्स दर्शकों को खूब हँसाते हैं।
निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने जॉनर-ब्लेंडिंग का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है — हॉरर और रोमांस को हास्य के साथ जोड़ना आसान नहीं, लेकिन उन्होंने इसे सहजता से निभाया है। ताड़का का एंट्री सीन, आलोक के घर डिनर सीन और इंटरवल पॉइंट जैसे दृश्य याद रह जाते हैं।
हालाँकि, फिल्म की शुरुआत थोड़ी तेज़ लगती है और आलोक के प्रोफेशनल बैकग्राउंड को उतना नहीं दिखाया गया जितना ज़रूरी था। दूसरे हाफ में गति थोड़ी धीमी हो जाती है, और क्लाइमेक्स भले विज़ुअली शानदार है, लेकिन उतना प्रभावशाली नहीं जितनी उम्मीद थी।
अभिनय
- आयुष्मान खुराना अपने करियर के सबसे बहुमुखी प्रदर्शनों में से एक पेश करते हैं — हास्य, संवेदना और रोमांच के बीच उनका बैलेंस बेहतरीन है।
- रश्मिका मंदाना पूरी फिल्म की आत्मा हैं। उनका रहस्यमयी और शक्तिशाली किरदार हर फ्रेम में चमकता है।
- परेश रावल अपने हास्य और पिता के रूप में भावनात्मक गहराई से फिल्म को और मानवीय बनाते हैं।
- नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का किरदार याद दिलाता है उनके किक (2014) वाले अंदाज़ की, और उनका हर संवाद सटीक टाइमिंग के साथ हंसी और डर दोनों लाता है।
- फैसल मलिक (पुलिस अफसर पी.के. यादव) प्रभावशाली हैं, जबकि गीता अग्रवाल शर्मा और वरुण धवन (भेड़िया के रूप में कैमियो) अपने छोटे लेकिन दमदार रोल में चमकते हैं।
संगीत और तकनीकी पहलू
- सचिन–जिगर का संगीत ऊर्जा से भरा है, खासकर ‘दिलबर की आँखों का’ और ‘पॉइज़न बेबी’ जैसे गाने युवाओं को पसंद आएंगे। ‘रहें ना रहें हम’ और ‘तुम मेरे ना हुए’ भावनाओं को खूबसूरती से उभारते हैं।
- डीएनईजी का VFX विश्वस्तरीय है — जीवों और रहस्यमयी दृश्यों को बेहद यथार्थ रूप में दिखाया गया है।
- सौरभ गोस्वामी की सिनेमैटोग्राफी शानदार है, जबकि ग्रांट हुले और परवेज़ शेख के एक्शन सीन खास प्रभाव डालते हैं।
- हेमंती सरकार की एडिटिंग पहली छमाही में टाइट है, लेकिन बाद में थोड़ा खिंचाव महसूस होता है।
कुल मिलाकर, ‘Thamma’ एक मनोरंजक और अच्छी तरह से पैक की गई फिल्म है जो मेडॉक हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स को और मजबूत बनाती है। आयुष्मान और रश्मिका की जोड़ी, दमदार निर्देशन और रोमांचक विज़ुअल्स इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं।



